कबीरधामछत्तीसगढ़

बोड़ला :- आदिवासी बैगा बालक आश्रम-लूप की प्राथमिक शाला में गंभीर लापरवाही के आरोप मध्यान्ह भोजन में बच्चों की थाली से दाल गायब!

मध्यान्ह भोजन में बच्चों की थाली से दाल गायब!

बैगा बालक आश्रम-लूप की प्राथमिक शाला में गंभीर लापरवाही के आरोप, बच्चों ने कहा दाल बहुत कम बनती है सब्जी से ही करते हैं भोजन

लूप। आदिवासी बैगा बालक आश्रम-लूप में संचालित प्राथमिक शाला में बच्चों को दिए जाने वाले मध्यान्ह भोजन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विद्यालय में निरीक्षण के दौरान बच्चों की थाली में निर्धारित भोजन के सभी व्यंजन नजर नहीं आए। विशेष रूप से दाल नहीं परोसी जा रही थी, जबकि मध्यान्ह भोजन योजना के तहत बच्चों को निर्धारित मेन्यू के अनुसार पौष्टिक एवं संतुलित भोजन उपलब्ध कराया जाना शासन की महत्वपूर्ण व्यवस्था है। इस मामले की जानकारी देने के लिए बोड़ला विकास खंड शिक्षा अधिकारी भानुप्रताप चंद्राकार को फोन किया गया तो रिसीव नहीं किए। शुक्रवार 1.40 बजे । विकास सोनी द्वारा।

मौके पर भोजन व्यवस्था से जुड़े रसोइया से दाल के संबंध में पूछे जाने पर बताया गया कि “दाल शुक्रवार को ही बनाते हैं।” वहीं विद्यालय के प्रधानपाठक से दाल के संबंध में जानकारी लेने पर उनके द्वारा स्पष्ट जवाब देने के बजाय गोलमोल जवाब दिए जाने की बात सामने आई। इससे विद्यालय की मध्यान्ह भोजन व्यवस्था पर कई गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

और भी गंभीर स्थिति तब सामने आई, जब विद्यालय में मौजूद शिक्षकों द्वारा स्वयं भोजन किए जाने की जानकारी मिली। प्रधानपाठक से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने दाल बनने की जानकारी से अनजान होने की बात कही। वहीं मौके पर मौजूद एक व्यक्ति ने बताया कि वह नियमित रसोइया नहीं है, बल्कि रसोइया के स्थान पर आज काम करने आया है। इससे यह सवाल भी उठता है कि विद्यालय में मध्यान्ह भोजन की जिम्मेदारी किसकी निगरानी में और किस व्यवस्था के तहत संचालित हो रही है?

बच्चों ने बताई भोजन व्यवस्था की हकीकत

विद्यालय के बच्चों से भोजन के संबंध में जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि दाल बहुत कम बनती है और वे अक्सर सब्जी के साथ ही भोजन करते हैं। यदि बच्चों की यह बात सही है तो यह केवल भोजन की गुणवत्ता का मामला नहीं, बल्कि शासन की मध्यान्ह भोजन योजना के क्रियान्वयन और बच्चों के पोषण से जुड़ा गंभीर विषय है।

सरकार द्वारा बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए राशि, खाद्यान्न एवं निर्धारित मेन्यू की व्यवस्था की जाती है। ऐसे में यदि बच्चों की थाली तक निर्धारित व्यंजन नहीं पहुंच रहे हैं तो खाद्यान्न और भोजन सामग्री का वास्तविक उपयोग कहां हो रहा है, इसकी जांच जरूरी है।

जांच हुई तो सामने आ सकती है पूरी तस्वीर

मध्यान्ह भोजन में निर्धारित व्यंजन नहीं मिलने के आरोपों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि विद्यालय में प्रतिदिन कितने बच्चों के नाम पर मध्यान्ह भोजन बनाया जाता है, कितनी मात्रा में चावल, दाल, सब्जी एवं अन्य सामग्री प्राप्त होती है और वास्तव में बच्चों को कितनी मात्रा में भोजन परोसा जाता है?

मामले में संबंधित विभाग द्वारा मध्यान्ह भोजन की उपस्थिति पंजी, मेन्यू, खाद्यान्न स्टॉक रजिस्टर, खरीदी-वितरण संबंधी अभिलेख, भोजन की मात्रा तथा समूह के भुगतान की जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही बच्चों और अभिभावकों के बयान लेकर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।

अधिकारियों से उठे सीधे सवाल

  • क्या विद्यालय में निर्धारित मेन्यू के अनुसार प्रतिदिन मध्यान्ह भोजन दिया जा रहा है?
  • यदि दाल निर्धारित भोजन का हिस्सा है तो बच्चों को दाल क्यों नहीं परोसी गई?
  • रसोइया के स्थान पर दूसरे व्यक्ति से भोजन बनवाने की व्यवस्था किसकी अनुमति से की गई?
  • विद्यालय में शिक्षकों के लिए भोजन की व्यवस्था किस नियम के तहत की जा रही है?
  • मध्यान्ह भोजन के लिए प्राप्त खाद्यान्न एवं अन्य सामग्री का पूरा हिसाब उपलब्ध है या नहीं?
  • बच्चों की थाली में निर्धारित भोजन नहीं पहुंचने की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

मामला बच्चों के भोजन और पोषण से जुड़ा होने के कारण इसे महज विद्यालय की छोटी-मोटी अव्यवस्था मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। संबंधित अधिकारियों को तत्काल विद्यालय का औचक निरीक्षण कर रिकॉर्ड एवं मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान कराना चाहिए। यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

बच्चों के हिस्से का निवाला किसी भी स्थिति में व्यवस्था की लापरवाही की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर बच्चों की थाली तक पूरा भोजन पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करते हैं या फिर मामले को कागजी जवाब देकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

VIKASH SONI

Founder & Editor

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