
कवर्धा/कबीरधाम। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) योजना के तहत बदौरा से पटेवाछापर जामुनपानी तक बनाई जा रही सड़क एवं नाली निर्माण परियोजना को लेकर सवाल उठने लगे हैं। निर्माण स्थल की तस्वीरों में गिट्टी और निर्माण सामग्री के ढेर दिखाई दे रहे हैं, वहीं नाली निर्माण का कार्य भी नजर आ रहा है। ऐसे में निर्माण कार्य की गुणवत्ता, सामग्री के उपयोग और स्वीकृत राशि के अनुरूप काम किए जाने को लेकर संबंधित विभाग की जांच आवश्यक प्रतीत होती है।

निर्माण स्थल पर लगे सूचना बोर्ड के अनुसार, पैकेज क्रमांक CG-09-136 (जनमन) के तहत सड़क की लंबाई 4.30 किलोमीटर तथा अनुमानित निर्माण लागत 256.88 लाख रुपये दर्शाई गई है। बोर्ड में कार्य प्रारंभ करने की तिथि 05 सितंबर 2024 और कार्य पूर्णता की तिथि 04 सितंबर 2025 अंकित है। इसके अतिरिक्त पांच वर्षों के संधारण के लिए 20.30 लाख रुपये की राशि भी दर्ज है। सूचना बोर्ड पर ठेकेदार के रूप में कुर्मी बेना कंस्ट्रक्शन कंपनी, कवर्धा का नाम अंकित है।


256.88 लाख की सड़क, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
इतनी बड़ी राशि की सड़क निर्माण परियोजना में गुणवत्ता मानकों का पालन और निर्माण सामग्री का उचित उपयोग बेहद महत्वपूर्ण है। निर्माण स्थल की तस्वीरों के आधार पर गुणवत्ता में गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की पुष्टि नहीं की जा सकती, लेकिन कार्य की वास्तविक स्थिति, उपयोग की गई सामग्री, सड़क की मोटाई, नाली निर्माण के मानकों तथा भुगतान की गई राशि की तकनीकी जांच कराए जाने की आवश्यकता है।
निर्धारित समय-सीमा के बाद भी कार्य की स्थिति स्पष्ट हो
सूचना बोर्ड के अनुसार, परियोजना की कार्य पूर्णता तिथि 04 सितंबर 2025 निर्धारित थी। ऐसे में संबंधित विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि सड़क एवं नाली निर्माण का कार्य निर्धारित समय पर पूरा हुआ या नहीं। यदि कार्य अधूरा है, तो देरी के कारणों तथा अब तक किए गए भुगतान की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
तकनीकी जांच और भुगतान की जांच की मांग
इस मामले में संबंधित अधिकारियों से मांग की जानी चाहिए कि निर्माण कार्य का स्थल निरीक्षण कराकर तकनीकी गुणवत्ता की जांच की जाए। साथ ही स्वीकृत प्राक्कलन, माप पुस्तिका (एमबी), निर्माण सामग्री की गुणवत्ता संबंधी रिपोर्ट, ठेकेदार को किए गए भुगतान तथा संधारण संबंधी प्रावधानों की जांच की जाए। यदि जांच में अनियमितता या सरकारी राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
पीएम-जनमन योजना का उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की बसाहटों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना है। इसलिए इस योजना के तहत होने वाले निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि सरकारी धन का सही उपयोग हो और ग्रामीणों को टिकाऊ सड़क एवं बेहतर आवागमन सुविधा मिल सके।




