कबीरधामछत्तीसगढ़

DMF फंड के 30 लाख के कार्य पर उठे सवाल: जांच में ‘सब सही’, शिकायतकर्ता ने बताया लीपापोती

DMF फंड के 30 लाख के कार्य पर उठे सवाल: जांच में ‘सब सही’, शिकायतकर्ता ने बताया लीपापोती

जाँच समिति सवालों के घेरे में

कवर्धा जिला अस्पताल कवर्धा में DMF (जिला खनिज न्यास) फंड से कराए गए बाथरूम एवं शौचालय मरम्मत कार्य में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। इस संबंध में 17 फरवरी 2026 को कलेक्टर कबीरधाम को लिखित शिकायत दस्तावेजों के साथ सौंपी गई थी, लेकिन जांच रिपोर्ट ने पूरे मामले को “सही” बताते हुए शिकायत को निराधार करार दे दिया।

शिकायतकर्ता द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2022-23 में लोक निर्माण विभाग द्वारा लगभग 30 लाख रुपये की लागत से जिला अस्पताल के विभिन्न बाथरूम एवं शौचालयों का मरम्मत एवं सुधार कार्य कराया गया।

रिकॉर्ड में नल, फ्लोर एवं वॉल टाइल्स, एल्युमिनियम दरवाजे, सेनेटरी सामग्री (कमोड, बेसिन) और प्लाईवुड दरवाजों का कार्य दर्शाया गया है।

शिकायत में अनुमान लगाया गया कि यदि लगभग 30 बाथरूम/शौचालय हैं, तो औसतन प्रति यूनिट 1 लाख रुपये खर्च दर्शाया गया—जिसकी वास्तविकता पर सवाल उठाए गए।

जांच समिति गठित, लेकिन जांच पर ही सवाल

शिकायत के बाद जांच समिति गठित की गई, जिसमें

  1. शिव कुमार सिन्हा, अनुविभागीय अधिकारी, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा उपसंभाग कवर्धा
  2. नितिन शर्मा, उप अभियंता, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा उपसंभाग कवर्धा, को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया।

24 मार्च 2026 को जिला अस्पताल में शिकायतकर्ता की उपस्थिति में निरीक्षण किया गया। लेकिन जांच प्रक्रिया ही विवादों में आ गई।

सिर्फ घूमकर देख लिया, नाप-जोख नहीं”

शिकायतकर्ता का आरोप है कि:जांच अधिकारियों ने सिर्फ बाथरूम/शौचालय का सामान्य निरीक्षण किया, कोई तकनीकी मापन (Measurement) या नाप-जोख नहीं किया गया, न ही वास्तविक कार्य और दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन किया गया, इसके बावजूद रिपोर्ट में लिखा गया कि “कार्य स्थल पर कार्य सही पाया गया।”

स्टीमेट और MB मिलाकर सही बता दिया”

आरोप है कि जांच अधिकारियों ने केवल स्टीमेट एवं MB एमबी (मेजरमेंट बुक) का मिलान कर रिपोर्ट तैयार कर दी, जबकि मौके पर तकनीकी जांच नहीं की गई।

इस पर सवाल उठ रहा है कि: जब दस्तावेजों के आधार पर ही निष्कर्ष निकालना था, तो स्थल निरीक्षण का औपचारिकता क्यों निभाई गई?

विभागीय मिलीभगत की आशंका

शिकायतकर्ता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि: कहीं एक विभाग दूसरे विभाग को बचाने की कोशिश तो नहीं कर रहा?

स्थानीय स्तर पर यह कहावत भी चर्चा में है—

चोर-चोर मौसेरे भाई”, जो इस पूरे मामले पर सटीक बैठती नजर आ रही है।

वरिष्ठ अधिकारी ने क्या कहा?

ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन अभियंता सुरेंद्र कुमार पटेल से जब इस संबंध में सवाल किया गया, तो उनका जवाब भी चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने कहा:

“ऐसी शिकायत करो जिसमें पुराना काम नया दिखाया गया हो—जैसे दरवाजा पुराना हो और नया बताया गया हो—तब कुछ होगा।”

इस बयान ने जांच की गंभीरता और निष्पक्षता पर और सवाल खड़े कर दिए हैं।

सबसे बड़ा सवाल

क्या 30 लाख रुपये का कार्य वास्तव में जमीन पर उतना ही हुआ है?

बिना तकनीकी जांच के “सब सही” कैसे मान लिया गया?

क्या यह जांच सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई?

मांग

शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच (थर्ड पार्टी या उच्च स्तरीय टीम से) कराने की मांग की है, ताकि वास्तविकता सामने आ सके।

VIKASH SONI

Founder & Editor

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button