
पंडरिया विधायक के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाजी-सड़क निर्माण रुकवाने का आरोप – भड़के ग्रामीणों ने घेरा कवर्धा PWD कार्यालय
देर रात तक चले प्रदर्शन के आगे झुका प्रसासन,सड़क निर्माण को लेकर मिला लिखित विभागी दस्तावेज,एकता और हौशले की जीत हुई।

कवर्धा। पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के बंसाशापुर–प्राणखैरा–आमादाह–धोराबंद मार्ग के रुके हुए सड़क निर्माण को लेकर आखिरकार जनता का आक्रोश फूट पड़ा। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण महिला, पुरुष, युवा, मजदूर, किसान, बुजुर्ग और बच्चे चूल्हा-बर्तन, डेरा-डंडी, रापा और गैती लेकर कवर्धा स्थित लोक निर्माण विभाग (PWD) कार्यालय पहुंच गए और जोरदार रैली निकालते हुए कार्यालय का घेराव कर दिया।
ग्रामीणों ने पोस्टर-बैनर के साथ नारेबाजी करते हुए पंडरिया विधायक भावना बोहरा और संबंधित विभाग के खिलाफ जमकर विरोध दर्ज कराया। आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव और सत्ता के अहंकार के कारण सड़क निर्माण कार्य को रोक दिया गया है, जिससे क्षेत्र की हजारों जनता भारी परेशानियों का सामना कर रही है।


आंदोलन के दौरान माहौल कई बार तनावपूर्ण भी हुआ। जब पुलिस प्रशासन ने आंदोलनकारियों को कार्यालय के अंदर जाने से रोकने का प्रयास किया तो ग्रामीणों और पुलिस के बीच कई बार झूमा-झपटी की स्थिति भी बनी। इसके बाद आक्रोशित ग्रामीण कार्यालय गेट के सामने ही धरने पर बैठ गए और सड़क निर्माण तत्काल शुरू करने की मांग पर अड़े रहे।
आंदोलन देर रात तक जारी रहा। इस दौरान ग्रामीण अपने साथ लाए चूल्हा-बर्तन से धरना स्थल पर ही भोजन बनाकर खाते रहे और स्पष्ट संदेश दिया कि जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
ग्रामीणों के जबरदस्त जनदबाव और उग्र आंदोलन के आगे आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा। विभाग की ओर से ग्रामीणों को सह-हस्ताक्षरित लिखित पत्र सौंपा गया, जिसमें विवादित सड़क के लिए नया टेंडर लगाकर उसे अपलोड करने तथा अधिकतम 20 अप्रैल तक सड़क निर्माण कार्य पुनः शुरू करने का स्पष्ट आश्वासन दिया गया।
लिखित विभागीय आश्वासन मिलने के बाद ही ग्रामीणों ने अपने आंदोलन को अस्थायी रूप से समाप्त किया।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा में सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया तो इससे भी बड़ा उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों की होगी।
यह आंदोलन क्षेत्र की जनता की एकजुटता और संघर्ष का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां ग्रामीणों ने अपने अधिकार की लड़ाई उग्र जनआंदोलन के दम पर जीतकर दिखा दी।



