कबीरधामछत्तीसगढ़

कुम्हार समाज की शिकायत निकली भ्रामक! पीएम आवास रोकने के लिए प्रशासन और विधायक को किया गया गुमराह।

कुम्हार समाज की शिकायत निकली भ्रामक! पीएम आवास रोकने के लिए प्रशासन और विधायक को किया गया गुमराह।

पटवारी जांच और स्थल निरीक्षण में खुली सच्चाई,30 साल से रह रहे गरीब परिवार के आवास निर्माण पर खड़ा किया गया विवाद।

पंडरिया/पंडरिया ब्लॉक के ग्राम कोदवागोड़न में कुम्हार समाज की जमीन पर अवैध कब्जा और मकान निर्माण के आरोपों की हकीकत राजस्व विभाग की जांच में सामने आ गई है। प्रशासन को दिए गए शिकायत पत्र में जिस भूमि को कुम्हार समाज की मिट्टी खदान बताकर प्रधानमंत्री आवास निर्माण रोकने की मांग की गई थी, वह दावा जांच में पूरी तरह भ्रामक और तथ्यों से परे पाया गया है।

स्थल निरीक्षण, सीमांकन और राजस्व अभिलेखों की जांच के बाद स्पष्ट हुआ कि जिस स्थान पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान का निर्माण हो रहा है, उसका कुम्हार समाज को आवंटित मिट्टी खदान से कोई संबंध नहीं है। विवादित भूमि साप्ताहिक बाजार क्षेत्र की सीमा पर स्थित है, जहां पूर्व में शासन का महिला कर्मचारी आवास हुआ करता था।

30 वर्षों से रह रहा है गरीब परिवार

ग्रामीणों के अनुसार करीब तीन दशक पहले शासकीय भवन जर्जर होने के बाद तत्कालीन ग्राम पंचायत सरपंच सुरेश तिवारी ने बेघर और अत्यंत गरीब तुलसी पनरिया परिवार को वहां रहने की अनुमति दी थी। तब से परिवार उसी लगभग दो डिसमिल भूमि पर जर्जर भवन की मरम्मत कर झोपड़ी बनाकर निवास कर रहा है।

तुलसी पनरिया का परिवार मजदूरी, डबलरोटी और कबाड़ बेचकर जीवनयापन करता है। शासन द्वारा पिछले वर्ष उसके नाम प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किया गया था, लेकिन निर्माण कार्य शुरू होते ही कुछ लोगों द्वारा लगातार आपत्ति दर्ज कराकर कार्य रुकवाने का प्रयास किया जाता रहा।

व्यक्तिगत रंजिश में पीएम आवास रोकने का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोगों ने व्यक्तिगत रंजिश के चलते सामूहिक दबाव बनाकर निर्माण कार्य बाधित किया। इतना ही नहीं, सीमावर्ती किसानों की निजी भूमि को भी सामाजिक जमीन बताकर विवाद खड़ा करने और दबाव बनाने की शिकायतें सामने आई हैं।

हाल ही में ग्राम पंचायत और ग्रामीणों के सहयोग से जब आवास निर्माण दोबारा शुरू हुआ तो उसे रोकने के लिए विधायक और जिला प्रशासन को शिकायत पत्र सौंपा गया, जिसमें 40 कुम्हार परिवारों के प्रभावित होने का दावा किया गया।

शिकायत पत्र पर उठे गंभीर सवाल

जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि गांव में कुम्हार समाज के कुल 10 से 12 परिवार ही निवास करते हैं। इनमें भी सीमित परिवार पारंपरिक मिट्टी शिल्प कार्य से जुड़े हुए हैं। वहीं शिकायत पत्र में दर्ज कई हस्ताक्षरों और अंगूठे के निशानों को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि कुछ ऐसे लोगों के नाम भी आवेदन में शामिल किए गए हैं जिनका निधन वर्षों पहले हो चुका है अथवा जिन्होंने आवेदन पर सहमति नहीं दी थी।

राजस्व रिकॉर्ड ने खोली पूरी पोल

पटवारी द्वारा सरकारी नक्शों और खसरा रिकॉर्ड का मिलान करने पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई। राजस्व अभिलेखों के अनुसार कुम्हार समाज को मिट्टी निकालने के लिए खसरा नंबर 141 में पहले से पर्याप्त भूमि उपलब्ध है, जहां उनके कार्य में कोई बाधा नहीं है।

वहीं जिस भूमि पर प्रधानमंत्री आवास का निर्माण हो रहा है, उसके किसी भी सरकारी रिकॉर्ड में कुम्हार समाज के स्वामित्व अथवा आवंटन का उल्लेख नहीं मिला। प्रशासनिक जांच के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि पीएम आवास निर्माण को लेकर प्रस्तुत शिकायत तथ्यात्मक रूप से सही नहीं थी।

सोशल मीडिया में भी फैली भ्रामक जानकारी

मामले की वास्तविक स्थिति सामने आने से पहले सोशल मीडिया पर भी कई भ्रामक खबरें प्रसारित की गईं, जिससे गांव में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई। अब राजस्व जांच रिपोर्ट के बाद पूरे मामले की तस्वीर साफ हो चुकी है और प्रशासनिक रिकॉर्ड ने शिकायत के दावों की पुष्टि नहीं की है।

VIKASH SONI

Founder & Editor

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