
बैगा समाज का ऐतिहासिक फैसला: शादी-ब्याह में डीजे और शराब पर पूर्ण प्रतिबंध पारंपरिक संस्कृति को मिलेगा नया जीवन
कबीरधाम। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में बैगा समाज ने सामाजिक सुधार, सांस्कृतिक संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए शादी-विवाह, छठी एवं अन्य सामाजिक आयोजनों में डीजे और शराब के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। समाज की विशेष बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया, जिसे क्षेत्र में सामाजिक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

बैठक में समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं ग्रामीणों ने वर्तमान समय में बढ़ते दिखावे, फिजूलखर्ची और सामाजिक आयोजनों में बढ़ रहे अनावश्यक खर्च पर गंभीर चिंता व्यक्त की। वक्ताओं ने कहा कि आज कई गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार सामाजिक प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च करने को मजबूर हो जाते हैं। कई परिवारों को शादी और अन्य कार्यक्रमों के लिए कर्ज तक लेना पड़ता है, जिससे वर्षों तक आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए समाज ने सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया कि भविष्य में बैगा समाज के सभी सामाजिक आयोजनों को सादगीपूर्ण और पारंपरिक स्वरूप में आयोजित किया जाएगा। समाज का मानना है कि खुशियों का उत्सव दिखावे और महंगे खर्च से नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सहयोग और सामाजिक एकता से मनाया जाना चाहिए।
बैठक में यह भी तय किया गया कि अब शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्यक्रमों में डीजे की जगह बैगा समाज की पारंपरिक सांस्कृतिक पहचान रहे मांदर, नगाड़ा और पारंपरिक लोक वाद्ययंत्रों का उपयोग किया जाएगा। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में नई पीढ़ी धीरे-धीरे अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं से दूर होती जा रही है। ऐसे में पारंपरिक वाद्ययंत्रों को बढ़ावा देने से युवाओं में अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान और जुड़ाव बढ़ेगा तथा समाज की पहचान भी सुरक्षित रहेगी।
बैगा समाज के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि समाज आधुनिक सोच और विकास का विरोधी नहीं है, लेकिन आधुनिकता के नाम पर अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को छोड़ना उचित नहीं माना जा सकता। इसलिए यह निर्णय केवल एक प्रतिबंध नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने का एक सामूहिक प्रयास है।
बैठक में नशामुक्त समाज के निर्माण पर भी विशेष जोर दिया गया। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि अब समाज के किसी भी सामाजिक आयोजन में शराब परोसने या उसका सेवन करने की अनुमति नहीं होगी। समाज का मानना है कि नशे की लत से पारिवारिक कलह बढ़ती है, आर्थिक स्थिति कमजोर होती है और सामाजिक वातावरण भी प्रभावित होता है। इस निर्णय के माध्यम से समाज स्वस्थ, सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
इसके अलावा मृत्यु संस्कार अर्थात दशगात्र को लेकर भी नई सामाजिक व्यवस्था लागू की गई। निर्णय के अनुसार अब किसी परिवार में मृत्यु होने पर समाज के प्रत्येक घर से 20 रुपये नकद तथा एक पैली (लगभग 4 से 5 किलोग्राम) चावल सहयोग स्वरूप दिया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य शोकाकुल परिवार को आर्थिक और सामाजिक सहयोग प्रदान करना है, ताकि दुख की घड़ी में पूरा समाज एकजुट होकर परिवार के साथ खड़ा रहे।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि बैगा समाज हमेशा से सामूहिक सहयोग, आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता के लिए जाना जाता रहा है। नए नियम इसी परंपरा को और अधिक मजबूत करेंगे। समाज के लोगों ने विश्वास जताया कि इन निर्णयों से अनावश्यक खर्च में कमी आएगी, गरीब परिवारों को राहत मिलेगी, नशामुक्त वातावरण का निर्माण होगा और बैगा समाज की सांस्कृतिक पहचान को नई पीढ़ी तक सुरक्षित पहुंचाया जा सकेगा।
इस महत्वपूर्ण बैठक में सेक्टर भोरमदेव के अध्यक्ष शुक्लाल बैगा, संरक्षक कृष्णा बैगा, पूर्व जिलाध्यक्ष एवं जिला संरक्षक कामू बैगा, झूलूराम बैगा सहित बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी, वरिष्ठजन एवं ग्रामीण उपस्थित रहे। बैठक के अंत में सभी सदस्यों ने नए सामाजिक नियमों का पालन करने, समाज में जागरूकता फैलाने तथा प्रत्येक परिवार तक इन निर्णयों को पहुंचाने का सामूहिक संकल्प लिया।
बैगा समाज का यह निर्णय वर्तमान समय में सामाजिक सुधार, आर्थिक संतुलन, नशामुक्ति और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय पहल माना जा रहा है। समाज को उम्मीद है कि इन फैसलों से आने वाले वर्षों में सामाजिक एकता और पारंपरिक मूल्यों को नई मजबूती मिलेगी तथा युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति और विरासत पर गर्व महसूस करेगी।



