
बैगा संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल दमगढ़ में गुरु-शिष्य परंपरा कला दीक्षा कार्यक्रम का हुआ गरिमामय आयोजन
पंडरिया/कुकदुर वनांचल क्षेत्र के ग्राम दमगढ़ में बैगा जनजाति की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोककला और पारंपरिक लोकनृत्य को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित गुरु-शिष्य परंपरा कला दीक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत पंडरिया विकासखंड के बैगा बाहुल्य ग्राम दमगढ़ में एक गरिमामय सांस्कृतिक आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बैगा समाज की पारंपरिक कला, संस्कृति और लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने उपस्थित अतिथियों एवं ग्रामीणों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम में संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली के अधिकारी दीपक जोशी तथा पद्मश्री सम्मानित अनुप रंजन पांडेय ने विशेष रूप से उपस्थित होकर बैगा लोकनृत्य प्रशिक्षण का अवलोकन किया। दोनों अतिथियों का बैगा समाज के लोगों ने अपनी पारंपरिक संस्कृति के अनुरूप बीजन माला पहनाकर आत्मीय स्वागत किया। अतिथियों ने बैगा समाज द्वारा अपनी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे भारतीय लोक संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल बताया।
कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि पिछले एक वर्ष से गुरु माता श्रीमती पुनिया बाई कड़मिया एवं उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ युवा पुरस्कार से सम्मानित धनीराम कड़मिया के मार्गदर्शन में बैगा लोकनृत्य का नियमित प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में वर्तमान में 5 बैगा बालिकाएं एवं 5 बैगा बालक भाग ले रहे हैं, जिन्होंने अपनी आकर्षक और पारंपरिक प्रस्तुतियों से उपस्थित अतिथियों का दिल जीत लिया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का समय-समय पर संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली द्वारा ऑनलाइन मूल्यांकन भी किया जाता रहा है। प्रशिक्षण की उत्कृष्ट प्रगति और प्रतिभागियों के उत्साह को देखते हुए अकादमी ने आगामी एक वर्ष के लिए इस योजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत 5 नई बालिकाओं एवं 5 नए बालकों का चयन कर उन्हें भी बैगा लोकनृत्य का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक युवा अपनी सांस्कृतिक पहचान से जुड़ सकें।
कार्यक्रम में लोकनृत्य प्रस्तुतियों को जीवंत बनाने में संगतकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। परसराम, मंतराम, मोहन सिंह एवं कुंवर सिंह ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर संगत देकर पूरे वातावरण को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया। कलाकारों की प्रस्तुति पर उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर बैगा समाज के प्रमुख अध्यक्ष इतवारी राम मछिया एवं बुध सिंह बैगा की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने समाज के युवाओं से अपनी संस्कृति, भाषा, लोकनृत्य और परंपराओं को जीवित रखने का आह्वान किया तथा कहा कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि गोपी कृष्णा सोनी (शिक्षक, लेखक एवं बैगा संस्कृति शोधकर्ता) ने भी सहभागिता करते हुए अपनी शोध आधारित पुस्तक अतिथियों को भेंट की। उन्होंने बैगा संस्कृति के दस्तावेजीकरण, संरक्षण और शोध कार्यों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी तथा कहा कि बैगा समाज की लोक परंपराएं, गीत, नृत्य और रीति-रिवाज देश की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित करना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि बैगा संस्कृति के संरक्षण के लिए समाज, शोधकर्ताओं और सांस्कृतिक संस्थाओं के सामूहिक प्रयासों से आने वाली पीढ़ियां अपनी पहचान और परंपराओं से जुड़ी रहेंगी। इस दिशा में गुरु-शिष्य परंपरा कला दीक्षा कार्यक्रम एक प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है।
कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों ने प्रशिक्षु बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल आने वाले समय में बैगा संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में मील का पत्थर साबित होगी।
इस अवसर पर जे. के. वर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक, लोक कलाकार, बैगा समाज के वरिष्ठजन, महिलाएं, युवा एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम का वातावरण पारंपरिक लोकगीतों, नृत्य और सांस्कृतिक उत्साह से सराबोर रहा, जिसने बैगा समाज की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को एक बार फिर जीवंत कर दिया।



