
बोड़ला बीईओ कार्यालय पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप, शिक्षक में आक्रोश
बोड़ला (कबीरधाम)। विकास खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय बोड़ला की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चोरभट्टी के शिक्षकों ने विकास खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर नियमों की आड़ में पक्षपातपूर्ण और दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया है।
एक को वेतन कटौती की सजा, दूसरे पर मेहरबानी
पीड़ित शिक्षक के अनुसार, महज एक घंटे अनुपस्थित रहने पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। उनके द्वारा स्पष्टीकरण सौंपे जाने के बावजूद विभाग ने एक दिन का वेतन काट लिया।
दूसरी ओर, 13 दिसंबर 2025 को सहायक विकास खंड शिक्षा शेखर सिंह राजपूत द्वारा शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चोरभट्टी का औचक निरीक्षण किया गया था। इस दौरान एक अन्य शिक्षक अनुपस्थित पाए गए थे और निरीक्षण पंजी में प्रश्नवाचक चिन्ह भी लगाया गया था। इसके बावजूद, उक्त शिक्षक पर वेतन काटना तो दूर, लंबे समय तक नोटिस तक जारी नहीं किया गया।
शिकायत के बाद जागी विभागीय नींद जब पीड़ित शिक्षक ने बोड़ला बीईओ कार्यालय पहुंचकर इस असमान कार्रवाई पर आपत्ति जताई, तब जाकर शिक्षा विभाग की नींद टूटी। खानापूर्ति करते हुए विभाग ने 14 जनवरी 2026 को उस शिक्षक को नोटिस जारी किया।
स्कूल के प्रधानपाठक ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मासिक वेतन पत्रक (Pay Roll) में संबंधित शिक्षक को अनुपस्थित ही दर्शाकर भेजा था। इसके बावजूद विभाग द्वारा नियम ताक पर रखकर पूरा वेतन जारी कर देना कई सवाल खड़े करता है।
“प्रधानपाठक द्वारा अनुपस्थित दर्ज किए जाने के बाद भी पूरा वेतन जारी करना समझ से परे है। कुछ शिक्षकों के जवाब देने पर तुरंत चेतावनी नोटिस जारी हो जाता है, जबकि इस मामले में इतनी सहानुभूति क्यों दिखाई गई?” — पीड़ित शिक्षक
कार्यालय की सफाई: ‘काम की अधिकता से हुई देरी’इस पूरे मामले पर जब विकास खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जवाब मांगा गया, तो विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी भानु प्रताप चंद्राकर और सहायक शिक्षा अधिकारी शेखर सिंह राजपूत ने काम की अधिकता के चलते नोटिस विलम्ब से जारी हुआ है विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि संबंधित शिक्षक का वेतन नहीं कटा है।
कार्य वाही पर उठते सवाल प्रधानपाठक और पीड़ित शिक्षक के बयानों से स्पष्ट है कि विभाग अलग-अलग शिक्षकों के लिए अलग-अलग नियम अपना रहा है। क्षेत्र के शिक्षकों का कहना है कि एक तरफ आम शिक्षकों पर मामूली चूक पर सख्त कार्रवाई की जाती है, वहीं दूसरी तरफ अनुपस्थित रहने वाले चहेते शिक्षकों पर मेहरबानी क्यों?
इस पूरे मामले की जाँच और उचित कार्यवाही की मांग उक्त शिक्षक ने मांग की है।


