
वनांचल क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई : कुकदूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों और संसाधनों की भारी कमी, मरीज परेशान।

कबीरधाम जिले के वनांचल और पहाड़ी क्षेत्रों के हजारों ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र माने जाने वाला कुकदूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों गंभीर अव्यवस्थाओं, स्टाफ की कमी और संसाधनों के अभाव से जूझ रहा है। अस्पताल की मौजूदा स्थिति ऐसी हो गई है कि मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा, वहीं उनके परिजनों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बढ़ते मरीजों के दबाव और सीमित संसाधनों के बीच अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नजर आ रही है।
अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सड़क दुर्घटना, जहर सेवन, मारपीट, सर्पदंश, मौसमी बीमारियों और अन्य गंभीर मामलों के मरीज रोजाना यहां पहुंच रहे हैं। लेकिन अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर और तकनीकी कर्मचारी नहीं होने के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। हालत इतने खराब हैं कि अस्पताल के वार्डों के सभी बेड भरे होने के कारण कई मरीजों का उपचार इंजेक्शन कक्ष में ही करना पड़ रहा है। वहीं मरीजों के परिजन अस्पताल के फर्श पर चादर बिछाकर रात गुजारने को मजबूर हैं।
अस्पताल परिसर में प्रवेश करते ही व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति साफ दिखाई देती है। यहां पानी पीने के गिलास और पानी निकालने के बर्तन तक रस्सी से बांधकर रखने पड़ रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि खुले छोड़ने पर ये सामान अक्सर गायब हो जाते हैं। यह स्थिति अस्पताल में संसाधनों की कमी और सुरक्षा व्यवस्था की कमजोर स्थिति को भी दर्शाती है।
जानकारी के अनुसार कुकदूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ तीन एमबीबीएस डॉक्टर लंबे अवकाश पर हैं, जिसके चलते अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के सभी पद पहले से रिक्त पड़े हैं। इसके अलावा फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, एक्स-रे टेक्नीशियन और एंबुलेंस चालक जैसे महत्वपूर्ण पद भी खाली हैं। इससे मरीजों को जांच और उपचार के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।
स्टाफ की कमी का असर अस्पताल की ड्यूटी व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। उपलब्ध रोस्टर के अनुसार डॉक्टरों और ग्रामीण चिकित्सा सहायकों (आरएमए) की ड्यूटी सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक निर्धारित की गई है। लगातार 12 घंटे की ड्यूटी के बाद भी इमरजेंसी की स्थिति में कर्मचारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। स्वास्थ्य कर्मचारियों का कहना है कि सीमित स्टाफ के कारण लगातार दबाव में काम करना पड़ रहा है।
वर्तमान स्थिति यह है कि अस्पताल में एक ही डॉक्टर को ओपीडी, इमरजेंसी, मेडिकल लीगल केस (एमएलसी) और पोस्टमार्टम जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां एक साथ संभालनी पड़ रही हैं। ऐसे में किसी भी गंभीर स्थिति में मरीजों को तत्काल उपचार मिलना मुश्किल हो जाता है। कई बार एक ही समय में अलग-अलग मामलों के आने पर स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो जाती है।
कुकदूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत कुकदूर, कामठी, मुनमुना, पोलमी, भेलकी, भाकुर, सेंदुरखार, नेऊर, रुखमीदादर, बदना और पंडरीपानी सहित कुल 11 उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित होते हैं। इन वनांचल और दुर्गम क्षेत्रों के हजारों ग्रामीण इलाज के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। बारिश के मौसम में सड़क संपर्क प्रभावित होने और दूरस्थ गांवों से मरीजों के पहुंचने में होने वाली कठिनाइयों के कारण यह अस्पताल क्षेत्र के लोगों के लिए जीवन रेखा माना जाता है। ऐसे में यहां स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी लोगों की चिंता बढ़ा रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और बढ़ती आबादी को देखते हुए अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टरों और तकनीकी कर्मचारियों की तत्काल नियुक्ति की आवश्यकता है। लोगों का कहना है कि कई बार गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की परेशानी बढ़ जाती है। वनांचल क्षेत्र में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह स्थिति और अधिक कठिन हो जाती है।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, पर्याप्त बेड की व्यवस्था, जांच सुविधाओं का विस्तार और एंबुलेंस सेवाओं को मजबूत किया जाए। उनका कहना है कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को समय पर उचित उपचार नहीं मिल पाता, जिससे कई बार गंभीर परिणाम सामने आते हैं।
वर्तमान में कुकदूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन पंडरिया ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) के प्रभार में किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि पहाड़ी और वनांचल क्षेत्र की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए यहां स्थायी प्रशासनिक व्यवस्था और नियमित निगरानी की आवश्यकता है। उनका कहना है कि यदि समय रहते पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
इस संबंध में पंडरिया बीएमओ डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि तीन डॉक्टरों के अवकाश पर होने के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों के अनुसार ड्यूटी रोस्टर तैयार किया गया है तथा आवश्यकतानुसार कर्मचारियों को ऑन-कॉल भी रखा गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उपलब्ध संसाधनों के बीच बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि वनांचल क्षेत्र के हजारों लोगों की स्वास्थ्य जरूरतों को देखते हुए केवल अस्थायी व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं। क्षेत्र में स्थायी डॉक्टरों की नियुक्ति, तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता और अस्पताल की आधारभूत सुविधाओं में सुधार समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है।



