
गृहमंत्री के गृह जिले में PMGSY सड़क निर्माण पर उठे सवाल: ग्रामीणों ने लगाया घटिया निर्माण और अनियमितता का आरोप।
बोड़ला। ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत निर्मित एक सड़क को लेकर कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड में विवाद खड़ा हो गया है। दलदली मुख्य मार्ग से अगरी तक निर्मित सड़क की गुणवत्ता पर ग्रामीणों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने गंभीर सवाल उठाते हुए निर्माण कार्य में अनियमितता और गुणवत्ता से समझौता किए जाने का आरोप लगाया है।
जानकारी के अनुसार, इस सड़क का निर्माण लगभग ₹248.99 लाख की लागत से कराया जा रहा है तथा इसका निर्माण कार्य ठेकेदार तिलक राम चंद्रवंशी को सौंपा गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वीकृत तकनीकी मानकों के अनुसार सड़क की मजबूत नींव तैयार करने के लिए निर्धारित आकार की गिट्टी और आवश्यक परतों का उपयोग किया जाना था, लेकिन वास्तविक निर्माण में इन मानकों का पालन नहीं किया गया। उनका दावा है कि कई स्थानों पर गिट्टी की जगह मुरुम और मिट्टी का अधिक उपयोग किया गया, जिससे सड़क की गुणवत्ता प्रभावित हुई।
स्थानीय सरपंच का कहना है कि सड़क का उद्घाटन प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा द्वारा किया गया था। इसके बावजूद निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों ने विभागीय निगरानी और निरीक्षण व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जिम्मेदार एजेंसियां समय पर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच करतीं, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
ग्रामीणों के अनुसार, सड़क पर डामरीकरण का कार्य अप्रैल माह में पूरा हुआ था, लेकिन शुरुआती बारिश के बाद ही कई स्थानों पर डामर उखड़ने लगा। उनका कहना है कि इतनी कम अवधि में सड़क की परत उखड़ना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर संदेह पैदा करता है।
इस पूरे मामले में ग्रामीणों ने गुणवत्ता परीक्षण कराने, निर्माण सामग्री की जांच करने तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की सरकारी राशि से बनने वाली सड़कें टिकाऊ और मानकों के अनुरूप होनी चाहिए ताकि ग्रामीणों को लंबे समय तक उसका लाभ मिल सके।
अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ है या नहीं, और यदि अनियमितता हुई है तो दोषियों पर क्या कार्रवाई की जाती है।





