
कवर्धा -रिश्वत मांगने के आरोप पर सहायक ग्रेड-2 सुमित सोनी का पक्ष-जबरदस्ती टेबल में पैसे रखकर फंसाने की कोशिश बकाया टैक्स को लेकर विवाद होने का दावा।
कवर्धा। परिवहन विभाग कवर्धा में रिश्वत मांगने के आरोप से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में है। कुमार चंद्रवंशी द्वारा साझा किए जा रहे वीडियो में सहायक ग्रेड-2 सुमित सोनी पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया है। सोनी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने किसी शासकीय कार्य के बदले पैसे नहीं मांगे। उनका दावा है कि चंद्रवंशी ने उन्हें फंसाने के लिए जबरदस्ती टेबल पर पैसे रखे। सोनी के अनुसार, विवाद बकाया टैक्स जमा कराने को लेकर हुआ।
ड्राइविंग लाइसेंस के काम में रिश्वत मांगने से इनकार
सोनी ने बताया कि कुमार चंद्रवंशी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए कार्यालय आए थे। उनके अनुसार, प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की गई और इसके बदले कोई रिश्वत नहीं मांगी गई। उन्होंने वायरल वीडियो को अपनी छवि प्रभावित करने वाला बताते हुए आरोप लगाया कि उन्हें फंसाने के उद्देश्य से टेबल पर पैसे रखे गए।
2009 से बकाया टैक्स का हवाला
सोनी के मुताबिक, चंद्रवंशी से संबंधित वाहन का टैक्स वर्ष 2009 से बकाया है। कार्यालय में उन्हें बकाया राशि की जानकारी देकर नियमानुसार भुगतान करने को कहा गया, जिसके बाद विवाद हुआ और रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए वीडियो वायरल किया गया। सोनी ने यह भी आरोप लगाया कि चंद्रवंशी ने राजनीतिक संपर्कों का हवाला देकर उनका स्थानांतरण और निलंबन कराने की धमकी दी।
ट्रक पर 14.66 लाख रुपये से अधिक टैक्स बकाया
परिवहन अधिकारी गौरव पटले ने बताया कि वायरल वीडियो के संबंध में सुमित सोनी से स्पष्टीकरण मांगा गया था, जिसे उन्होंने प्रस्तुत कर दिया है।
कुमार चंद्रवंशी से संबंधित ट्रक क्रमांक CG 09-0617 पर 14,66,842 रुपये का टैक्स बकाया है। अधिकारी के अनुसार, नियमानुसार कार्रवाई कर राशि जमा कराने की प्रक्रिया की जाएगी।
टैक्स बकाया होना रिश्वत के आरोप को स्वतः सही या गलत साबित नहीं करता। इसके लिए संबंधित दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच जरूरी है।
वीडियो और विभागीय रिकॉर्ड की जांच जरूरी
मामले में एक पक्ष ने रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है, जबकि सोनी ने इससे इनकार करते हुए पैसे रखकर फंसाने और बकाया टैक्स को लेकर विवाद होने की बात कही है। वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए वायरल वीडियो की पूरी रिकॉर्डिंग, बातचीत का संदर्भ, वाहन के टैक्स दस्तावेज और विभागीय रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
फिलहाल, उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों की जांच पूरी होने तक किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।



