
सरस्वती साइकिल योजना से बेटियों को मिली सपनों की नई उड़ान
पीएम श्री सेजेस बोड़ला में छात्राओं को निःशुल्क साइकिलों का वितरण
बोड़ला। बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं के लिए विद्यालय तक पहुंच आसान बनाने के उद्देश्य से पीएम श्री सेजेस बोड़ला में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अंतर्गत सरस्वती साइकिल योजना के तहत निःशुल्क साइकिल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पात्र छात्राओं को साइकिल प्रदान की गई। नई साइकिल पाकर छात्राओं के चेहरों पर खुशी और उत्साह साफ नजर आया।

कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अतिथियों ने छात्राओं को साइकिल प्रदान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रत्येक बेटी का अधिकार है और किसी भी छात्रा के सामने आवागमन की समस्या उसकी पढ़ाई में बाधा नहीं बननी चाहिए। सरस्वती साइकिल योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
अतिथियों ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि साइकिल केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की ओर बढ़ता हुआ एक कदम है। छात्राएं नियमित रूप से विद्यालय आएं, मन लगाकर पढ़ाई करें और अपने जीवन में निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर मेहनत करें।
ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों से विद्यालय आने वाली छात्राओं के लिए साइकिल मिलने से आने-जाने में सुविधा के साथ समय की भी बचत होगी। इससे विद्यालय में उनकी नियमित उपस्थिति बढ़ने और शिक्षा के प्रति उनका उत्साह और मजबूत होने की उम्मीद है।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं में खासा उत्साह देखने को मिला। साइकिल प्राप्त करने वाली छात्राओं ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अब विद्यालय आने-जाने में उन्हें काफी सुविधा होगी। उन्होंने इस योजना के लिए शासन एवं विद्यालय परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन व्याख्याता रवि कुमार वर्मा ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्राचार्य विजय खरे के मार्गदर्शन में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं स्टॉफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
इस अवसर पर विदेशी राम धुर्वे, प्रेमकांत मिश्र, विजय पाटिल, नरेश चन्द्रवंशी, मोहन कश्यप, गौतम गुप्ता, कांशी राम उइके, चंद्रप्रकाश त्रिवेदी एवं चैन सिंह खुसरो सहित अन्य अतिथियों की उपस्थिति रही।
विद्यालय परिवार ने सभी अतिथियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बेटी के हाथ में साइकिल और आंखों में शिक्षा का सपना—यही एक सशक्त एवं आत्मनिर्भर समाज की पहचान है।
**“साइकिल से बढ़ेंगे कदम, शिक्षा से संवरेंगे सपने।
बेटियों की उड़ान से रोशन होगा भविष्य अपना।”**



