पंडरिया–ग्राम पंचायत पड़कीकला में सावन-भादो के पावन माह में पारंपरिक तिहार भोजली का उत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया है।

पंडरिया–ग्राम पंचायत पड़कीकला में सावन-भादो के पावन माह में कबीरधाम जिले में पारंपरिक तिहार भोजली का उत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया है।

ग्रामीण अंचलों से लेकर नगर तक महिलाएं और बालिकाएं गीत-संगीत के साथ भोजली का पूजन कर सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे का संदेश दे रही हैं।
भोजली तिहार में महिलाएं नदी, तालाब या कुएं से पवित्र जल लाकर गेहूं या अन्य अनाज के बीज बोती हैं, जिसे सात से नौ दिन तक बड़े जतन से सींचा जाता है। अंतिम दिन मतलब आज शाम को हरी-भरी भोजली को सिर पर रखकर महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हुई शोभायात्रा के रूप में नगर व गांव की गलियों से होकर निकलती हैं और फिर नदी या तालाब में विसर्जन करती हैं।
कवर्धा जिले में यह तिहार न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण और सामूहिक सहभागिता की अनूठी मिसाल भी है। इस अवसर पर महिलाएं एक-दूसरे के घर जाकर शुभकामनाएं देती हैं और गांवों में मेल-मिलाप का माहौल बनता है।
इस तरह भोजली तिहार कवर्धा में संस्कृति, आस्था, प्रकृति प्रेम और भाईचारे का जीवंत प्रतीक बनकर लोगों को जोड़ने का कार्य कर रहा है।